क्या भारतीय मीडिया,मुफ्तखोर और दलाल है ?

बॉलीवुड अदाकारा कंगना रनौत ने दो वीडियो जारी किए हैं जिसमें उन्होंने पत्रकारों को निशाना बनाते हुए दावा किया है कि कुछ “दीमक”, “छद्म उदारवादी”,“pseudo-liberal” “विश्वासघाती”“treacherous” और “केवल मुफ्त भोजन प्राप्त करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेते हैं।

क्या भारतीय मीडिया दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है। ?

“We should all be concerned about the future because we will have to spend the rest   of our life there “Charles. F.Kettering (American inventor & businessman)

“हम सभी को भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए, क्योंकि हमें अपना शेष जीवन वहीं बिताना होगा”.

                         ” चार्ल्स एफ केटरिंग अमेरिकी आविष्कारक और व्यवसायी”

चुनाव के नतीज़े चाहे जो भी हों, पर प्रियंका गांधी का चुनाव प्रचार अशोक कुमार अभिनीत सीरियल “दादा दादी की कहानियाँ” और उसके मुखड़े गीत ” दादा दादी की कहानियाँ बरसों  याद रही” की तर्ज़  पर चल पड़ा है.

2014 ___ “दादी  की साड़ी” 2019 “दादी जैसी नाक”. इसके अतिरिक्त बेरोजगारी,(UNEMPLOYMENT) गरीबी (POVERTY) रोजगार(EMPLOYMENT),देश,(COUNTRY) जनता,साम्प्रदायिकता (COMMUNALISM) जैसे शब्द चुनाव मे वोट लेने के लिए कांग्रेस की पहचान बन चुके हैं, और जिसका प्रयोग कांग्रेस वोट a.t.m की तरह करती है .सच से दूर इन शब्दों का एक अलग राजनीतिक अर्थ (Political-meaning) होता है और अब तो  हर राजनीतिक पार्टी इन शब्दों का प्रयोग एक हथियार की तरह करती है.चुनाव मे नेता जी इन फ़र्ज़ी शब्दों को सुना कर रस्म-अदायगी कर लेते हैं और जनता सुन कर.( इसकी जननी भी कांग्रेस ही है) कांग्रेसी  दरबारी “जो इंदिरा भारत हैं और भारत इंदिरा का नारा”  लगा चुके हों, और भारत में अनगिनत संख्या मे स्कूल कॉलेज, यूनिवर्सिटी ,हॉस्पिटल ,सरकारी भवन ,सरकारी  योजनाए जिस परिवार के नाम पर हों, मोबाइल के समय मे एक शोध का विषय(Topic of research) हो सकता है की आम भारतीय दैनिक जीवन मे हैलो या गाँधी परिवार का  नाम ज्यादा प्रयोग करता है.

Glimpses of world history:———–  “Some old inscriptions from south India tell us how the members of the panchayats were elected, their qualifications and disqualifications. if any member did not render accounts of public funds he was disqualified.  Another very interesting rule seems to have been that near relative of members were disqualified from office. How excellent if this could be enforced now in all our councils and assemblies and municipalities .” (Jawahar lal Nehru)

 (Glimpses of world history) मे नेहरु जी ने प्राचीन दक्षिण-भारत की पंचायती व्यवस्था की तारीफ करते हुए लिखा था कि ——– “. दक्षिण भारत के कुछ पुराने शिलालेख हमें बताते हैं कि कैसे पंचायतों के सदस्य चुने जाते थे, उनकी योग्यता और अयोग्यता क्या थी, यदि कोई भी सदस्य सार्वजनिक निधियों के खातों को प्रस्तुत नहीं कर पाता था तो वह अयोग्य  घोषित हो जाता था. एक और बहुत ही दिलचस्प नियम यह प्रतीत होता है कि, सदस्यों के निकट संबंधी को कार्यालय के पद से अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। यदि हमारी सभी परिषदों और विधानसभाओं और नगरपालिकाओं में इसे लागू किया जा सके तो कितना अच्छा  होगा.”

पर ये “दिव्य  ज्ञान  “( Divine knowledge) परिवार पर लागु  नहीं होता, ये दूसरो के लिए था. राहुल  गाँधी ने अपने परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ाते  हुए अमेरिका की Berkeley-University मे 2017  मे बताया  परिवारवाद भारत की पहचान है?(क्योंकि परिवार का इतिहास ही  भारत का इतिहास है?) भारत ऐसे ही चलता है? (क्योंकि  परिवार  लिए भारत को ऐसे  ही चलना चाहिए।?) 1947  के बाद इस कारण  से और परिवार  की जरूरत  के अनुसार  महात्मा गाँधी ,सुभाष चंद्र बोस ,विवेकानंद ,अरविन्द  घोष, सरदार पटेल ,लाल बहादुर शास्त्री   कभी महान कभी  अछूत (untouchable) कभी आतंकवादी(Terrorist) कभी अल्पज्ञानी (Little knowledge)_होते रहे. ” फ़िराक गोरखपुरी” (रघुपति सहाय फ़िराक) ने एक बार नेहरू जी  और प्रसिद्ध इतिहासकार” डॉक्टर ईश्वरी प्रसाद” के बीच इतिहास की किसी तारीख (DATE)  को ले कर हुई बहस को मज़ाक या,थोड़ा व्यंग  करते हुए कहा की ” बैठ जाओ  मास्टर, तुम इतिहास पढ़ाते हो नेहरू इतिहास  बनाता है”. ये बात भारत के भविष्य में किस हद तक सच होने वाली थी किसको पता था.

                                                     “जो जीतता है वही इतिहास लिखता है”

                            “सत्ता के खेल में विजयी  परिवार देश का एक नया इतिहास लिख रहा था”

   “Who controls the past controls the future who controls the present controls the past”( George Orwell.)

जो अतीत को नियंत्रित करता है वही भविष्य नियंत्रित करता है,जो वर्तमान को नियंत्रित करता है अतीत को नियंत्रित करता है.”

दरबारे आम से दरबारे खास में पहुंचने के लालायित पत्रकारों, नौकरशाहों, लेखकों , कलाकारों, दरबारियों  ने जनता के लिए ,और परिवार के फायदे के लिए एक” नया सिद्धांत”(NEW-RULE) बनाया और डाहल का देसी संस्करण (रुसी शब्दकोष (dictionary) जिसमें कम्युनिस्टों के जरुरत के हिसाब से ख़ास शब्द  भरे जाते थे,  और  राजनैतिक  सुधार के नाम पर  हर 420 हथकंडे अपनाये जाते थे). परिवार के द्वारा भी इन लेखकों ,पत्रकारों, नौकरशाहों, कलाकारों,दरबारियों का विशेष ख्याल रखा गया . वर्षों तक ये नाटक चलता रहा. दलाली का खेल केवल भारत तक ही  सीमित  नहीं था.YURI BEZMENOV (रुसी जासूस, K.G.B एजेंट ) जो भारत मे R.I.A NOVOSTI  ( Russia’s international news agency) में पत्रकार के रूप मे काम करते  थे, पर जिनका असल  काम भारत मे मार्क्सवादी-वामपंथी पत्रकारों ,लेखकों ,कलाकारों ,अमीर फिल्म निर्माताओं,विश्विविद्यालय के शिक्षकों बुद्धिजीवियों (अगर बुद्धिजीवी  का मतलब दलाल या  मार्क्सवादी-वामपंथी होना  होता है) को “थोड़े से पैसे और मुफ्त रूस  यात्रा  का लालच दे  कर”  अपने  मतलब के लिए भर्ती करना था .सरल शब्दों मे कहें तो दलाल खोजना था .Yuri Bezmenov के  बहुत से साक्षात्कार  YOU TUBE  पर   उपलब्ध  हैं, जिसमें उन्होने भारत में  रहते हुए  अपने   और K.G.B  की कार्य  प्रणाली(modus-operandi)  तथा कुछ दलालों की मिली-भगत  को विस्तार से बताया है.”

 “धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का”

अपने देश को बेच  रहे लोगों  की K.G.B  मे भी कोई इज़्ज़त नहीं थी  Yuri Bezmenov ने इनके लिए “ उपयोगी बेवकूफ़”( Useful idiots) और “राजनीतिक वेश्या”( Political prostitute)  जैसे शब्द का प्रयोग करते हुए मज़ाक उड़ाया है .आगे, सोवियत संघ के टूटने और मार्क्सवादी विचारधारा  का जुलूस निकल जाने  से सच  को छिपाना कठिन  होता जा रहा था. सोवियत संघ(रूस) में मार्क्सवादियों का सफाया हो चुका था और उनका काला-इतिहास  सबके सामने था. जब उनका ये हाल था तो जिनको रोटी फेंकी जाती थी उनका क्या होता. (बकरे की माँ कब तक खैर मनाती) इसी  दौरान “वासिलि मित्रोखिन”

GRATITUDE :– THE KGB AND THE WORLD THE MITROKHIN ARCHIVE ||

(vasili mitrokhin) के माध्यम से पश्चिमी देशों को  कुछ बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और जानकारी हाथ लगी,जिसमें विश्व भर में फैले(लाल-आतंकी RED-TERROR कम्युनिस्टों और उनके दलाल के सांठ गाँठ की जानकारी थी.वर्षो तक इसकी सच्चाई की जाँच (1992 से1999 तक) की गई और अंत मे इसे बेहद उपयोगी पाया गया.इसे “आँखे खोल देने वाले” बेहतरीन काम के रूप मे देखा गया. बाद में ये दस्तावेज मित्रोखिन आर्काइव (Mitrokhin archive)

के नाम से जाने गए और ये किताब के रूप मे प्रकाशित हुए.इंग्लैंड की संसदीय समिति(Parliamentary committee) ने बताया कि ”जांच के दौरान समिति(committee) को वासिली मित्रोखिन से मिलने का अवसर मिला। समिति का मानना है कि वह एक उल्लेखनीय प्रतिबद्धता और साहस के व्यक्ति है,जिसने अपने दृढ़ संकल्प से जेल या मृत्यु का जोखिम उठाया, और के.जी.बी. की वास्तविक प्रकृति और उनकी गतिविधियों के बारे में बताया, उनका मानना था कि ये लोग (K.G.B) अपने ही देश के हितों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।और वह इसमें सफल रहे हम उनकी इस उपलब्धि के लिए उनकी प्रशंसा करना चाहते हैं।” परंतु भारत मे इसे दोयम दर्जे का बता कर सब इस घटना पर पर्दा डालने मे लग गए, क्योंकि मित्रोखिन ने परिवार की एक सदस्य

image resource: wikipedia (Smt. Indira Gandhi)

भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी के भी पैसे के लेनदेन और(K.G.B) की भूमिका पर सवाल उठाए थे.“हमाम मे सभी नंगे”. मित्रोखिन के दस्तावेज़ों  के सामने आने से भारत मे परिवार,दरबारी,राजनीतिक-पार्टियों,( कांग्रेस और कम्युनिस्ट)दलाल पत्रकारों, नौकरशाहों,लेखकों,कलाकारों,वामपंथी,कम्युनिस्टों,मीडिया संगठनों के गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ,और ये भारत को और भारत का सब कुछ किसी भी देश (U.S.A, U.K, USSR, ) को  बेचने के लिए कितने लालायित थे का पता चला. 1994 में विश्व-प्रसिद्ध पत्रकार और “K.G.B ARCHIVE” पर शोध (research)और थीसिस(Thesis) लिखने वाली “YEVGENIA ALBATS” “येवजेनिया-एल्बेट्स”(इनकी थीसिस एक किताब) “The State With in a state:The k.g.b and its hold on Russia-Past,Present,and Future” के नाम से प्रकाशित हुई मे भी ऐसी ही बातों का जिक्र करते हुए K.G.B की फाइलों का हवाला दिया.a letter signed by viktor chebrikov who replaced andropov as head of the K.G.B  in 1982 noted: the U.S.SR  K.G.B maintains contact with the son of prime minister [Rajiv Gandhi]

image resource: wikipedia (R. Gandhi, Rajeev Gandhi)

“ R.Gandhi expresses deep gratitude for benefits accruing to the prime minister’s family from the commercial dealings of an indian firm he controls in corporations with soviet foreign trade  organizations. R.Gandhi reports confidentially  that a substantial portion  of the funds obtained through this channel are used to support the party of R Gandhi (K.G.B archive,f.5,OP.6, por.no.12,d.i3i,t.i,1,d. 103-104)

  एक पत्र जिस पर विक्टर-चेब्रिकोव  के हस्ताक्षर हैं जो 1982 मे आंद्रोपोव के बाद K.G.B  के मुखिया  हुए : रूस की  K.G.B अपने संबंधों को  प्रधानमंत्री  के पुत्र से (राजीव गाँधी ) से बनाए  हुए  है. R.GANDHI विदेशी व्यापार संगठनों(Foreign trade organizations) के साथ विभागों में नियंत्रण (control) करने वाली एक भारतीय फर्म के वाणिज्यिक सौदे (Commercial deal) से प्रधानमंत्री के परिवार को होने वाले लाभों के लिए गहरा आभार व्यक्त करते हैं। R.GANDHI गोपनीय रूप से रिपोर्ट करते हैं कि इस चैनल के माध्यम से प्राप्त धन का एक बड़ा हिस्सा R.GANDHI की पार्टी का समर्थन करने के लिए उपयोग किया जाता है. (K.G.B archive, f.5,OP.6, por.no.12,d.i3i,t.i,1,d. 103-104)

 Syed Ghulam Nabi Fai(सैयद गुलाम नबी फई) एक भारतीय मुसलमान (अमरीकी-नागरिक) को अमेरिका मे 2011 मे F.B.I के द्वारा गिरफ्तार किया गया, अदालत ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई.

अपराध : अमेरिका मे गैरकानूनी रूप से पाकिस्तान(I.S.I) से पैसे लेना,और उसका प्रयोग अमेरिका मे कश्मीर पर lobbying,करने मे करना था. Fai की गिरफ़्तारी से उसके भारत से भी संबंधों का खुलासा हुआ. पाकिस्तानी सरकार से मिले पैसे से उसने आज़ाद-कश्मीर,और (पाकिस्तान के पक्ष), भारत मे भारत के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों की फौज तैयार कर ली थी. इस बार भी पाकिस्तान के ”( Useful idiots) लोगों मे वामपंथी-मार्क्सवादियों,दलाल-पत्रकारों,रिटायर्ड नौकरशाहों,सामाजिक कार्यकर्ताओं की भरमार थी. कुछ प्रमुख नाम:  Dileep-Padgaonkar(दिलीप-पड़गांवकर)THE TIMES OF INDIA का ये पत्रकार?Useful idiot मनमोहन सरकार के समय भारत सरकार के द्वारा कश्मीर पर वार्ताकार नियुक्त किया गया था.(ये कुत्ते से हड्डी की रखवाली करने जैसा ही काम था).

 PRAFUL-BIDWAI (प्रफुल्ल बिदवई): मार्क्सवादी-वामपंथी,पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता पाकिस्तान के  I.S.Iऔर इस्लामिक आतंकवाद समर्थित अख़बारों में भारत विरोधी बाते लिखने के लिए जाना जाता था.

RajinderSachar(राजिंदर सच्चर): पूर्व न्यायाधीश और भारत में मुसलमानों की ख़राब स्थिति के एक्सपर्ट कमेंट्रेटर  

 Kuldeep Nayar(कुलदीप नैयर):– वामपंथी-पत्रकार,पाकिस्तानी-प्रेमी और सामाजिक-कार्यकर्ता  

Harish Khare (हरीश-खरे):— “THE HINDU” “मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार”

Rita Manchanda,Ved Bhasin(रीता मनचंदा,वेद भसीन ):KashmirTimes

Harinder-Baweja,(हरिंदर-बवेजा):India today:

Gautam-Navlakha:(गौतम_नवलखा) वामपंथी-पत्रकार  इसे 2018 मे महाराष्ट्र पुलिस ने प्रधानमंत्री,नरेंद्र-मोदी की हत्या के षड़यंत्र(Conspiracy)मे गिरफ्तार भी किया था

मीरवाइज-उमर-फारूक,यासीन-मलिक: अलगाववादी नेता

Kamal.A.Mitra.Chenoy(कमल मित्र चेनॉय) वामपंथी,C.P.I ,आम आदमी पार्टी

स्वामी अग्निवेश, Magsaysay Award:( संदीप-पांडेय), AnganaChatterjee

Award-return-gang:जिस तरह से आतंकवादी संगठन अपने को छुपाने के लिए संगठन का नाम बदलते रहते हैं,पर काम और उससे जुड़े नाम नहीं बदलते उसी तरह से अवार्ड वापसी गिरोह मे Useful idiots की भरमार है.इस गिरोह के सदस्य एक जादुई कला(Magical-art) मे माहिर हैं ये अवार्ड और उसके साथ मिलने वाला पैसा तो हाँथ से लेते हैं पर वापस मुँह से करते हैं. वो भी केवल TV पर बहस के दौरान, आज तक किसी एक ने भी दिखावे के लिए ही सही अवार्ड और पैसा वापस करने का कलेजा नहीं दिखाया.वैसे भी “Love(पैसे) के लिए साला कुछ भी करेगा” से पैसा वापस करने की उम्मीद करना हथेली पर सरसो उगाने जैसा ही है.

परिवार का हर समय Award return gang और “टुकड़े-टुकड़े आंदोलन”का समर्थन करना किसी बहुत पुराने रिश्ते को निभाने जैसा ही है. ये रिश्ता क्या कहलाता है? का जवाब शायद नाना पाटेकर के तू मेरी खुजा मै तेरी से ही समझा जा सकता है. परिवार, दरबारी, के ये रिश्ते मे सबसे बड़ी बाधा बना मोबाइल. free-information की बाढ़ ने सूचना के ठेकेदारों, मीडिया संगठनो, की बखिया-उधेड़ कर रख दी. free-information के अपने फायदे और नुक्सान हैं,पर इसने सूचना के ठेकेदारों को कोई नया धंधा या नया मालिक खोजने के लिए मज़बूर कर दिया है. 77%अमेरिकी MAINSTREAM-MEDIA पर भरोसा नहीं करते, ऐसे मे भारत मे मीडिया का काला इतिहास देखते हुए कितने इस पर भरोसा करते हैं और ये कितना भरोसा लायक है आप खुद तय कर सकते हैं.       

Please share :       

Vivekananda(warrior monk)Varanasi

विवेकानंद ने अपना शरीर त्यागने से कुछ दिन पहले अपने आराध्य शिव की नगरी में जहाँ कुछ समय बिताया. ( गोपाल लाल विला) राजा काली कृष्ण ठाकुर का garden house

GOPAL LAL VILLA(VARANASI)

1971 भारत पाकिस्तान युद्ध के   नायक  hero” मानेकशॉ” ने एक बार कहा था कि”भारत की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार,राजनीति-दुर्बलता, जनसंख्या(Corruption, political will ,Population) नहीं वरन जिम्मेदार नेतृत्व का न होना  है”.

सिकंदर ने कहा था कि “मुझे शेरो की उस सेना से डर नहीं लगता जिसका  नेतृत्व एक भेड़िये के हाथ मे हो मुझे  भेडियो की  उस सेना से डर लगता है जिसका नेतृत्व एक  शेर के हाथ मे हो”. इन  बातों से नेतृत्व के महत्व का पता चलता है. परन्तु  लीडर  बनने  के लिए जरूरत होती है त्याग की, बलिदान की. अगर किसी बड़े काम को करने के लिए कोई व्यक्ति  जान देने को तैयार  हो तो  ही  वह सच्चा  लीडर  हो सकता है. विवेकानंद ने 1857 की क्रांति के असफल होने  का प्रमुख कारण  सच्चे  नेतृत्व का अभाव  बताया है इसी  कारण  से शायद , उन्होने  देश  को प्रतेक  क्षेत्र  मे सच्चा  नेतृत्व प्रदान करने वाले लोगो को जागृत  केर देश  सेवा  मे लगा दिया .  

  सैकड़ो वर्ष की गुलामी मे अपने धर्मं, भाषा, संस्कृति,  सभ्यता को हीन (inferior) समझने वाले और कुरीति, आडम्बर, ढकोसला (malpractice ,hypocrisy) को ही धर्म समझने वाले लोगो को किस प्रकार से उन्होनो जागृत (awake) किया, जिम्मेदार नेतृत्व में ये याद दिलाया, की तुम श्रेष्ठ हो किसी से कम नहीं.( तुम शुद्ध हो, मुक्त हो, महान हो) और वर्तमान में उसकी क्या उपयोगिता है जिससे मज़बूत भविष्य की नींव रखी जा सके. “गुलामी बुरी चीज़ है”(slavery is a bad thing) मद्रास में ये बात उन्होने कही जो एक नयी बात थी अभी तो देश में लोगों ने ऐसा सोचना शुरू भी नहीं किया था. वास्तव में स्वामी जी नायको के नायक थे. महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, अरविन्द घोष, निवेदिता, जमशेद जी टाटा, विमल मित्र शचीन्द्रनाथ सान्याल दो बार आजीवन कारावास की सजा पानेवाले (“हिंदुस्तान प्रजातंत्र संगठन” hindustan republican association H.R.A की स्थापना आप ही के द्वारा की गयी, जिनकी पुस्तक क्रांतिकारियों की बाईबिल “बंदी जीवन” के नाम से से जानी जाती थी और जिसका दो दर्जन से ज्यादा भाषा मे अनुवाद हुआ .आगे चलकर त्रैलोक्य चक्रवर्ती ,भगवती चरण वोहरा, चंद्रशेखर आजाद, नलिनी किशोर गुह, बाबा पृथ्वी सिंह, भगत सिंह, रास बिहारी बोस, सुखदेव, राजगुरु, लाला हरदयाल, अजीत सिंह आदि इन के  सहयोगी रहे ). राजनीतिक कारणों  से इस महापुरुष  को हम लगभग भुला ही  चुके हैं. वर्तमान मे अन्ना हजारे, नरेंद्र मोदी और अनगिनत लोगों के विवेकानंद प्रेरणा स्रोत हैं और रहेंगे. अलग अलग क्षेत्र के लोगों को एक व्यक्ति के द्वारा प्रभावित होना एक  दुर्लभ घटना है उन्होने सबसे पहले गरीब,दलित, महिलाओं (poor,depressed) की बात की. अनेक संत आए साधु आए, पर गरीब के बारे  मै ऐसी बाते किसी ने नहीं कही थी “दरिद्र नारायण” गरीब की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है यही मातृभूमि की सेवा है और मातृभूमि की सेवा ही सब से बड़ा कार्य .” विश्व का एक व्यक्ति  भी जब तक भूखा है प्रत्येक  व्यक्ति  तब तक गुनहगार है।“ उन्होने कहा की  हिन्दू धर्म केवल एक बर्तन धर्मं “मुझको मत छुओ”(don’t touch) पर आ कर रुक गया है उस समय हिन्दू धर्म मे खास कर ब्राह्मणो मे छुआछूत का बड़ा बोलबाला था. और सारा धर्म केवल खाने का बर्तन तक  सीमित हो कर रह गया था. किसी दलित के साथ खाना खाना तो दूर उसके बरतन को छू जाने से भी धर्म का नाश हो जाता था, इस प्रकार की परिस्थितियां  ईसाई धर्म प्रचारकों (Christian missionaries) और अंग्रेज़ों को बहुत भाती थी अकाल, गरीबी भूखमरी के कारण बंगाल मे आम लोगों का जीवन बहुत कठिन हो गया था  मृत्यु एक सामान्य घटना थी घर के पुरुष की मृत्यु पूरे परिवार को बेसहारा और लाचार बना देती थी. परिवार के अन्य सदस्य या विधवा हो चुकी औरतों जिनके पास कफन खरीदने के पैसे भी नहीं होते दाह संस्कार का खर्च और धार्मिक आडम्बर पाखंड धर्म भीरू समाज के डर से जीवित रहने के लिए धर्म परिवर्तन का सरल रास्ता अपना लेंती थीं हिन्दू धर्म की कुरीति, आडम्बर, ढकोसला छुआछूत (malpractice ,hypocrisy, untouchability) वास्तव मे हिन्दू धर्म के सबसे बड़े दुश्मन थे ये धर्म की सार्थकता (significance) को दीमक की तरह खा रहे थे. बंगाल के शिक्षित लोग केवल अंग्रेजों की खुशामद करना (flattery)और हिन्दू धर्म की बुराई कर अपने काम का अंत समझ लेते थे. बंगाल और देश के प्रतिष्ठित लोगो का समर्पण बंगाल में होने वाला ईसाई  धर्म परिवर्तन देश की आज़ादी को कितना नुकसान पहुंचाते ये सोच से भी परे है. इसी कारण से महात्मा गांधी और सरदार पटेल ने भी धर्म परिवर्तन का पुर ज़ोर विरोध किया, अफ्रीका महाद्वीप के अनेक देशों को धर्म प्रचारकों की मदद से फिर प्रशासन के गंदे खेल ने “मूल धर्म”(basic religion)  और “परिवर्तित धर्म”(converted religion) के लोगों में जो आग लगाई कि आज भी अनेक देश उस आग में झुलस रहे हैं .

गृह युद्ध(civil war) में लाखों  लोग मारे जा चुके हैं प्राकृतिक संसाधन(natural-resources) पर अपरोक्ष (through)रूप से यूरोप के देश कब्ज़ा किये बैठे हैं. हिन्दू धर्म मे खुद को श्रेष्ठ समझने का भ्रम पाले बैठी जातियों को अपने सम्बोधन मे कहा की “ये अपने लोग हैं( दलित अछूत) इनसे कैसी नफरत ?जिस दिन तुम्हारे गलत व्यवहार से ये तुम्हारे विरोधी हो गए बचने का रास्ता नहीं मिलेगा .“अपने इन्हीं कामों के कारण स्वामी जी हिन्दू  धर्म के पाखंडी, धर्म का धंधा करने वालों तथा  ईसाई  धर्म प्रचारकों दोनों को खटकने लगे, इन लोगों ने स्वामी जी को उल्टा सीधा कहने और गाली गलौज करने का कोई मौका नहीं छोड़ा. पर स्वामी जी अपने गुरु “रामकृष्ण परमहंस”,के बताए रास्ते पर मुट्ठी भर समर्थित बिना साधन के कुछ युवाओं के साथ देश सेवा और गरीबों और दुखियारों की सेवा मे लगे रहे. अपने  अमेरिका और  इंग्लैंड  प्रवास के समय उन्होने वहां अपनी संस्कृति ,धर्म का सच्चा अर्थ आम  लोगों  तक पहुंचाने  का  काम किया (1893 The parliament of the world’s religions) मे हिन्दू धर्म पर उनके विचार तो “अमृत वचन” हैं .हज़ारों  साल पुरानी हमारी सहिष्णुता,(tolerance) सहनशीलता योग, ध्यान से विश्व को अवगत (aware) कराया यही नहीं ईसाई धर्म प्रचारकों (Christian missionaries)  द्वारा भारत को अँधेरी दुनिया (dark world)और भारतीयों को असभ्य बता कर अमेरिका मे उन्हे सभ्य  बनाने का पुण्य काम (holy work) का दावा और चन्दा इकट्ठा करने की साजिश का भी खुलासा किया, अपने स्वभाव के अनुरूप अमेरिका और यूरोप  के अनेक क्षेत्रों  के विद्वानो को प्रभावित किया. महानतम वैज्ञानिकों मे से एक निकोला टेस्ला, ऐलडस हक्सले,टालस्टॉय,जा डी सेलिंगेर जैसे लेखक रॉकफेलर जैसे धनकुबेर(very rich)  उनके विचारों  से प्रभावित हुए रॉकफेलर जैसे धनकुबेर पूंजीपति का समाज की भलाई के इतनी ज्यादा मात्रा मे धन दान करना अपने आप में  एक अनोखी घटना थी  विवेकानंद को केवल सन्यासी मानना  गलत होगा वो एक योद्धा सन्यासी (warrior monk)थे. एक ऐसा युवा  योद्धा  सन्यासी जो अपने देश के लिए, धर्म, संस्कृति  सभ्यता, भाषा के लिए संपूर्ण  मानवता, के कल्याण के लिए और इनकी रक्षा के लिए आजीवन कहीं  भी लड़ने से पीछे नहीं हटा अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक बार कहा था कि” मै एक लड़ाकू शांतिप्रिय हूँ,  शान्ति  के लिए मैं  बुरे लोगों से हर वक़्त लड़ने को तैयार रहता हूँ. “विवेकानंद पर भी यह बात उतनी  ही सही बैठती है.

र्तमान में भारत की और विश्व  की अनेक समस्याए हैं- इस्लामिक टेररिज्म , इस्लामिक चरमपंथी,   i.s.i.s का उदय देश मे ईसाई धर्म प्रचारकों, धर्म परिवर्तन का गंदा  खेल, राजनीतिक बैर, वोट  बैंक  की राजनीति, अंधविश्वास, धार्मिक पाखण्ड और  हर शहर गाँव मे फैला पाखण्डियों का मायाजाल (हाल के वर्षों मे बाबा और गुरु जी)लोंगो की कारगुजारियों से  हम सब ही परिचित हैं. ये हमारी संस्कृति सभ्यता के सबसे बड़े दुश्मन हैं.  इन समस्याओं से समाज को किसी योद्धा  की तरह लड़ने की जरुरत है  विवेकानंद की मूर्ति  को माला  पहनाने से कुछ नहीं होगा.  उनके योद्धा की तरह किये गए कामोँ  को आने वाली पीढियों को बताना होगा , और उनकी ही तरह  लड़ना होगा  जब विश्व “सभ्यताओँ के संघर्ष (clash of civilization)” का एक खुला मैदान बन गया हो, तो अपनी सभ्यता संस्कृति  को बचाने  के लिए लड़ना ही पड़ता है. जो अपने महापुरुषों  से इतिहास  से नहीं सीखता उसको सभ्यताओँ के संघर्ष में  जीतने वाली सभ्यता से सीखना पड़ता है और ये सीख  आने वाली पीढियों  को बहुत भारी पड़ती  है.

                                विवेकानंद  और बनारस (वाराणसी)

एक चित्रकार (KRIPA) की कल्पना GOPAL-LAL VILA (1902)

 

GOPAL LAL VILA (VARANASI)

सिस्टर निवेदिता ने एक बार एक घटना का जिक्र करते हुए  बताया की विवेकानंद  की माँ भुवनेश्वरी देवी की एक पुत्र की इच्छा  थी जिस कारण  से बनारस मे अपने एक रिश्तेदार  को उन्होने बीरेश्वर महादेव (शिव मंदिर )में रोज़ उनके लिए पूजा करने का आग्रह किया 12 जनवरी 1863 को पुत्र  होने के बाद इसी कारण  से उसका नाम बीरेश्वर रखा गया परन्तु बोलने मे कठिन होने के कारण नामकरण के समय उनका नाम “नरेंद्र नाथ दत्त” (नरेन्) रखा गया लेकिन अपने घर वालों के लिए वो सदा “बिली” के नाम से ही जाने जाते रहे।  बाद मे अनेकों बार विवेकानंद  का बनारस आना हुआ विवेकानंद भूदेव मुखोपाध्याय, तैलंग-स्वामी से भी मिले.1890 गाजीपुर (बनारस के निकट ) इलाहाबाद भी इनका आना हुआ और इन स्थानों पर समय व्यतीत किया “भय पर विजय की शिक्षा” भी उन्हे यहीं मिली.  दुर्गाकुण्ड  मंदिर  से आते समय बंदरों से सामना होने पर एक साधु के कहने पर आप ने बंदरों से डर   के भागने के स्थान  पर बंदरों को भगाया ये छोटी घटना से स्वामी जी ने सच और डर का सामना करने का का अनोखा पाठ पढ़ा. इस छोटी घटना का उन पर बहुत प्रभाव पड़ा, और इसका जिक्र उन्होने अनेक स्थानों पर किया.  प्रमादादास मित्रा,  जिनसे विवेकानंद  की मित्रता थी, और उनसे उन्होने संस्कृत का भी  ज्ञान लिया था. प्रमादादास मित्रा जी ने गीता का इंग्लिश मे अनुवाद भी  किया था. स्वामी जी वाराणसी आने  पर इनके ही घर रुका करते थे. 1902  मे विवेकानंद  का आना एक  दूसरा अर्थ रखता था, अब वो स्वामी विवेकानंद विश्वप्रसिद्ध ,दार्शनिक और विद्वान थे, परन्तु बेहद कमज़ोर और बीमार, बंगाल के प्रसिद्ध लेखक शंकर ने अपनी किताब the monk  as man में chapter 4पेज 175 ,176  मे  उनकी 31 बिमारियों के बारे मे और  इन बिमारियों से दृहता से लड़ते हुए  सामाजिक भलाई मे लगे रहने का जिक्र  किया है.  स्वामी जी इस बार बनारस आ कर  राजा  काली  कृष्ण ठाकुर  के गार्डन हाउस गोपाल लाल  विला  मे रुके स्थानीय लोग  इस जगह  को सोंधा बास  भी कहते थे  यहाँ विवेकानंद जी लगभग एक महीना तक रुके राजा  काली  कृष्ण ठाकुर  के गार्डन हाउस गोपाल लाल  विला  का अपने पत्रो मे जिक्र करते हुए इस स्थान को स्वास्थ्य के अनुकूल बताया, स्वास्थ्य  ख़राब होने के बाद भी यहाँ  सामाज़िक  गतिविधियों मे लगे लोगों से मिलते रहे  स्वामी जी से प्रभावित हो कर “दरिद्र नारायण सेवा समिति” “poor men’s relief association”  का गठन करने वाले चारु चंद्र दास सहयोगी सदाशिवनन्द(आप ही ने स्वामी जी की इस बार बनारस में आगवानी की और गोपाललाल विला में उनके प्रवास के बारे मे स्वामी विवेकानंद संस्मरण नाम से एक लेख लिखा) लगभग प्रतिदिन मिलने आते थे आप लोगों के अनुरोध पर स्वामी जी ने संगठन का नाम” the Ramakrishna home of service”  कर दिया जो आगे चल कर और वर्तमान में वाराणसी का एक प्रमुख हॉस्पिटल है. समाज सेवा मे लगे उदय प्रताप से भी उनके गार्डन घर पर जा कर मिले.  केदार घाट के पुजारी से भी मुलाकात .की यहाँ से जाने के कुछ महीनों बाद ही(4july 1902) स्वामी जी मृत्यु हो गयी. स्वामी जी के अंतिम दिनों  का साक्षी उनका निवास स्थल वर्तमान मे गोपाल लाल विला एक खण्डहर बन चूका है क्या ही अच्छा होता की सरकार भारत की सांस्कृतिक राजधानी(cultural capital of India) वाराणसी मे इस खण्डहर को एक धरोहर रूप प्रदान करती, भारत की सांस्कृतिक राजधानी मे  भारत की संस्कृति को बचाने वाले और सम्पूर्ण विश्व को भारत की संस्कृति से परिचित कराने वाले योद्धा सन्यासी (warrior monk) विवेकानंद की इस धरोहर को बचाने का प्रयास तो होना ही चाहिए. वाराणसी  का पुराना नाम काशी है जिसका अर्थ होता है प्रकाश.  पर यहाँ प्रकाश का अर्थ ज्ञान से है कृत्रिम प्रकाश से नहीं. मालवीय जी ने भी वाराणसी को सर्व विद्या की राजधानी कहा था. गौतम बुद्ध महावीर स्वामी, कबीर, तुलसी, न जाने कितनो को इस शहर ने प्रभावित  किया देश ही नहीं विदेश मार्क ट्वेन,  स्टीव जॉब्स, जॉर्ज हैरिसन इस शहर से प्रेरणा लेते रहे. इस प्रकार से न जाने  कितने अनगिनत व्यक्तियों  प्रेरणा देने वाले शहर मे अनगिनत व्यक्तियों को प्रेरित करने वाले व्यक्ति का स्मारक  एक  पुनीत कार्य(holy work) होगा और ये स्वामी जी के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि.(tribute)